बाजहिं भेरि नफीरि अपारा
बाजहिं भेरि नफीरि अपारा
चौपाई २, दोहा ४१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
बाजहिं भेरि नफीरि अपारा। सुनि कादर उर जाहिं दरारा॥ देखिन्ह जाइ कपिन्ह के ठट्टा। अति बिसाल तनु भालु सुभट्टा॥ २ ॥
अर्थ
अगणित नफीरी और भेरी बज रही हैं, [जिन्हें] सुनकर कायरों के हृदय में दरारें पड़ जाती हैं। उन्होंने जाकर अत्यन्त विशाल शरीरवाले महान् योद्धा वानर और भालुओं के ठट्टे देखे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “युद्धारम्भ” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वानर और राक्षस सेनाओं के बीच लंका के महासंग्राम के आरंभ का वर्णन है।
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युद्धारम्भ