सुनत बिभीषन बचन राम के
सुनत बिभीषन बचन राम के
चौपाई १, दोहा ११७ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनत बिभीषन बचन राम के। हरषि गहे पद कृपाधाम के॥ बानर भालु सकल हरषाने। गहि प्रभु पद गुन बिमल बखाने॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी के वचन सुनते ही विभीषणजी ने हर्षित होकर कृपा के धाम श्रीरामजी के चरण पकड़ लिये। सभी वानर-भालू हर्षित हो गये और प्रभु के चरण पकड़कर उनके निर्मल गुणों का बखान करने लगे।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विभीषण द्वारा वानरों और भालुओं पर वस्त्र-आभूषण बरसाने और उनके हर्षपूर्वक धारण करने का वर्णन है।
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विभीषण का वस्त्राभूषण बरसाना