बहु बिधि कर बिलाप जानकी

चौपाई ६, दोहा ९९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड

चौपाई पाठ

बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की॥ कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी॥ ६ ॥

अर्थ

कृपानिधान श्रीरामजी की याद कर-करके जानकीजी बहुत प्रकार से विलाप कर रही हैं। त्रिजटा ने कहा— हे राजकुमारी! सुनो, देवताओं का शत्रु रावण हृदय में बाण लगते ही मर जायगा।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।

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त्रिजटा-सीता संवाद