प्रभु ताते उर हतइ न तेही
प्रभु ताते उर हतइ न तेही
चौपाई ७, दोहा ९९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही॥ ७ ॥
अर्थ
परन्तु प्रभु उसके हृदय में बाण इसलिये नहीं मारते कि इसके हृदय में जानकीजी (आप) बसती हैं।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “त्रिजटा-सीता संवाद” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में त्रिजटा द्वारा सीताजी को युद्ध-समाचार देकर धैर्य बँधाने और राम-विजय का आश्वासन देने का वर्णन है।
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त्रिजटा-सीता संवाद