देखि पवनसुत कटक बिहाला
देखि पवनसुत कटक बिहाला
चौपाई १, दोहा ५१ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
देखि पवनसुत कटक बिहाला। क्रोधवंत जनु धायउ काला॥ महासैल एक तुरत उपारा। अति रिस मेघनाद पर डारा॥ १ ॥
अर्थ
सारी सेना का बेहाल (व्याकुल) देखकर पवनसुत हनुमान् क्रोध करके ऐसे दौड़े मानो स्वयं काल दौड़ा आता हो। उन्होंने तुरंत एक बड़ा भारी पहाड़ उखाड़ लिया और बड़े ही क्रोध के साथ उसे मेघनाद पर छोड़ा।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “माल्यवान का रावण को समझाना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५१ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में माल्यवान द्वारा रावण को संधि और विवेक का परामर्श देने तथा रावण के दुराग्रह का वर्णन है।
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माल्यवान का रावण को समझाना