अतिसय प्रीति देखि रघुराई
अतिसय प्रीति देखि रघुराई
चौपाई १, दोहा ११९ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अतिसय प्रीति देखि रघुराई। लीन्हे सकल बिमान चढ़ाई॥ मन महुँ बिप्र चरन सिरु नायो। उत्तर दिसिहि बिमान चलायो॥ १ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी ने उनका अतिशय प्रेम देखकर सबको विमान पर चढ़ा लिया। तदनन्तर मन-ही-मन विप्र चरणों में सिर नवाकर उत्तर दिशा की ओर विमान चलाया।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ११९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-रामजी का पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या की ओर आनंदमयी प्रस्थान का वर्णन है।
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पुष्पक विमान से अयोध्या प्रस्थान