अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई
चौपाई १, दोहा ५ के अंतर्गत · लंकाकाण्ड
चौपाई पाठ
अस कौतुक बिलोकि द्वौ भाई। बिहँसि चले कृपाल रघुराई॥ सेन सहित उतरे रघुबीरा। कहि न जाइ कपि जूथप भीरा॥ १ ॥
अर्थ
कृपालु रघुनाथजी [तथा लक्ष्मणजी] दोनों भाई ऐसा कौतुक देखकर हँसते हुए चले। श्रीरघुवीर सेना सहित समुद्र के पार उतर गये। वानरों और उनके सेनापतियों की भीड़ कही नहीं जा सकती।
संदर्भ
यह लंकाकाण्ड के “राम का समुद्र पार, सुबेल पर निवास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम का सेना सहित समुद्र पार कर सुबेल पर्वत पर डेरा और रावण की व्याकुलता का वर्णन है।
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राम का समुद्र पार, सुबेल पर निवास