अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन

दोहा १५ (ख) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

अस बिचारि सुनु प्रानपति प्रभु सन बयरु बिहाइ। प्रीति करहु रघुबीर पद मम अहिवात न जाइ॥ १५ (ख) ॥

अर्थ

हे प्राणपति ! सुनिये, ऐसा विचारकर प्रभु से वैर छोड़कर श्रीरघुवीर के चरणों में प्रेम कीजिये, जिससे मेरा सुहाग न जाय।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का दोहा १५ (ख) है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी का राम-महिमा कथन