अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि

दोहा १५ (क) · लंकाकाण्ड

दोहा पाठ

अहंकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान। मनुज बास सचराचर रूप राम भगवान॥ १५ (क) ॥

अर्थ

शिव जिनका अहंकार हैं, ब्रह्मा बुद्धि हैं, चन्द्रमा मन हैं और महान् (महत्तत्त्व) ही चित्त हैं। उन्हीं चराचररूप भगवान् श्रीरामजी ने मनुष्यरूप में निवास किया है।

संदर्भ

यह लंकाकाण्ड के “मंदोदरी का राम-महिमा कथन” प्रकरण का दोहा १५ (क) है। इस प्रकरण में मंदोदरी द्वारा रावण को श्रीराम की दिव्य महिमा बताकर वैर छोड़ने की विनती का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
मंदोदरी का राम-महिमा कथन