यह उत्सव देखिअ भरि लोचन
यह उत्सव देखिअ भरि लोचन
चौपाई १, दोहा ८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन॥ कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा॥ १ ॥
अर्थ
हे कामदेवके मदको चूर करनेवाले! आप ऐसा कुछ कीजिये जिससे सब लोग इस उत्सवको नेत्र भरकर देखें। हे कृपाके सागर! कामदेवको भस्म करके आपने रतिको जो वरदान दिया सो बहुत ही अच्छा किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।
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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास