सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर

दोहा ८८ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु। निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु॥ ८८ ॥

अर्थ

हे शंकर! सब देवताओंके मनमें ऐसा परम उत्साह है कि हे नाथ! वे अपनी आँखोंसे आपका विवाह देखना चाहते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का दोहा ८८ है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।

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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास