सासति करि पुनि करहिं पसाऊ

चौपाई २, दोहा ८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ॥ पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा॥ २ ॥

अर्थ

हे नाथ! श्रेष्ठ स्वामियोंका यह सहज स्वभाव ही है कि वे पहले दण्ड देकर फिर कृपा किया करते हैं। पार्वतीने अपार तप किया है, अब उन्हें अंगीकार कीजिये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।

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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास