यह प्रसंग मैं कहा भवानी

चौपाई ४, दोहा १४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

यह प्रसंग मैं कहा भवानी। हरिमायाँ मोहहिं मुनि ग्यानी॥ प्रभु कौतुकी प्रनत हितकारी। सेवत सुलभ सकल दुखहारी॥ ४ ॥

अर्थ

[शिवजी कहते हैं कि] हे पार्वती! मैंने यह बतलाने के लिये इस प्रसंग को कहा कि ज्ञानी मुनि भी भगवान् की माया से मोहित हो जाते हैं। प्रभु कौतुकी (लीलामय) हैं और शरणागत का हित करनेवाले हैं। वे सेवा करने में बहुत सुलभ और सब दुःखों के हरनेवाले हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग