हरि अनंत हरिकथा अनंता

चौपाई ३, दोहा १४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हरि अनंत हरिकथा अनंता। कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता॥ रामचंद्र के चरित सुहाए। कलप कोटि लगि जाहिं न गाए॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीहरि अनन्त हैं (उनका कोई पार नहीं पा सकता) और उनकी कथा भी अनन्त है; सब संत लोग उसे बहुत प्रकार से कहते-सुनते हैं। श्रीरामचन्द्रजी के सुन्दर चरित्र करोड़ कल्पों में भी गाये नहीं जा सकते।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग