यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा
चौपाई २, दोहा १६६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
यह प्रगटें अथवा द्विजश्रापा। नास तोर सुनु भानुप्रतापा॥ आन उपायँ निधन तव नाहीं। जौं हरि हर कोपहिं मन माहीं॥ २ ॥
अर्थ
हे भानुप्रताप! सुनो, इस बात के प्रकट करने से अथवा ब्राह्मणों के शाप से तुम्हारा नाश होगा। अन्य किसी उपाय से तुम्हारी मृत्यु नहीं होगी, चाहे हरि और हर मन में क्रोध करें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा