सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा
सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा
चौपाई ३, दोहा १६६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सत्य नाथ पद गहि नृप भाषा। द्विज गुर कोप कहहु को राखा॥ राखइ गुर जौं कोप बिधाता। गुर बिरोध नहिं कोउ जग त्राता॥ ३ ॥
अर्थ
राजा ने मुनि के चरण पकड़कर कहा—हे स्वामी! सत्य ही है। ब्राह्मण और गुरु के क्रोध से, कहिये, कौन रक्षा कर सकता है? यदि ब्रह्मा भी क्रोध करें, तो गुरु बचा लेते हैं; पर गुरु से विरोध करने पर जगत में कोई भी बचाने वाला नहीं है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १६६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा