उर मनि माल कंबु कल गीवा
उर मनि माल कंबु कल गीवा
चौपाई ४, दोहा २३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
उर मनि माल कंबु कल गीवा। काम कलभ कर भुज बलसींवा॥ सुमन समेत बाम कर दोना। सावँर कुअँर सखी सुठि लोना॥ ४ ॥
अर्थ
वक्षःस्थल पर मणियों की माला है। शंख के समान सुन्दर गला है। कामदेव के हाथी के बच्चे की सूँड़ के समान (उतार-चढ़ाववाली एवं कोमल) भुजाएँ हैं, जो बल की सीमा हैं। जिसके बायें हाथ में फूलों सहित दोना है, हे सखि! वह साँवला कुँअर तो बहुत ही सलोना है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन