चारु चिबुक नासिका कपोला
चारु चिबुक नासिका कपोला
चौपाई ३, दोहा २३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
चारु चिबुक नासिका कपोला। हास बिलास लेत मनु मोला॥ मुखछबि कहि न जाइ मोहि पाहीं। जो बिलोकि बहु काम लजाहीं॥ ३ ॥
अर्थ
ठोड़ी, नाक और गाल बड़े सुन्दर हैं, और हँसी की शोभा मन को मोल लिये लेती है। मुख की छबि तो मुझसे कही ही नहीं जाती, जिसे देखकर बहुत-से कामदेव लजा जाते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन