उर धरि रामहि सीय समेता

चौपाई २, दोहा ३५३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

उर धरि रामहि सीय समेता। हरषि कीन्ह गुर गवनु निकेता॥ बिप्रबधू सब भूप बोलाईं। चैल चारु भूषन पहिराईं॥ २ ॥

अर्थ

फिर सीताजी सहित श्रीरामचन्द्रजी को हृदय में रखकर गुरु वसिष्ठजी हर्षित होकर अपने स्थान को गये। राजा ने सब ब्राह्मणों की स्त्रियों को बुलवाया और उन्हें सुन्दर वस्त्र तथा आभूषण पहनाये।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।

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बारात का अयोध्या लौटना