बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें
बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें
चौपाई १, दोहा ३५३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बिनय कीन्हि उर अति अनुरागें। सुत संपदा राखि सब आगें॥ नेगु मागि मुनिनायक लीन्हा। आसिरबादु बहुत बिधि दीन्हा॥ १ ॥
अर्थ
राजा ने अत्यन्त प्रेमपूर्ण हृदय से पुत्रों की और सारी सम्पत्ति को सामने रखकर [उन्हें स्वीकार करने के लिये] विनती की। परन्तु मुनिराज ने [पुरोहित के नाते] केवल अपना नेग माँग लिया और बहुत तरह से आशीर्वाद दिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना