बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं
बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं
चौपाई ३, दोहा ३५३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं। रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीं॥ नेगी नेग जोग सब लेहीं। रुचि अनुरूप भूपमनि देहीं॥ ३ ॥
अर्थ
फिर सब सुआसिनियों को (नगर भर की सौभाग्यवती बहिन, बेटी, भानजी आदि) बुलवा लिया और उनकी रुचि समझकर [उसी के अनुसार] उन्हें पहिरावनी दी। नेगी लोग सब अपना-अपना नेग-जोग लेते और राजाओं के शिरोमणि दशरथजी उनकी रुचि के अनुसार देते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का अयोध्या लौटना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३५३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद बारात का नववधुओं सहित अयोध्या लौटना और नगर में आनंदोत्सव का वर्णन है।
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बारात का अयोध्या लौटना