उमा महेस बिबाह बराती

चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

उमा महेस बिबाह बराती। ते जलचर अगनित बहुभाँती॥ रघुबर जनम अनंद बधाई। भवँर तरंग मनोहरताई॥ ४ ॥

अर्थ

श्रीपार्वतीजी और शिवजी के विवाह के बराती इस नदी में बहुत प्रकार के असंख्य जलचर जीव हैं। श्रीरघुनाथजी के जन्म की आनन्द-बधाइयाँ ही इस नदी के भँवर और तरंगों की मनोहरता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य