मानस मूल मिली सुरसरिही

चौपाई ३, दोहा ४० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मानस मूल मिली सुरसरिही। सुनत सुजन मन पावन करिही॥ बिच बिच कथा बिचित्र बिभागा। जनु सरि तीर तीर बन बागा॥ ३ ॥

अर्थ

इस (कीर्तिरूपी सरयू) का मूल मानस (श्रीरामचरित) है और यह [रामभक्तिरूपी] गङ्गाजी में मिली है, इसलिए यह सुननेवाले सज्जनों के मन को पवित्र कर देगी। इसके बीच-बीच में जो भिन्न-भिन्न प्रकार की विचित्र कथाएँ हैं वे ही मानो नदी-तट के आस-पास के वन और बाग हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य