बालचरित चहु बंधु के बनज बिपुल

दोहा ४० · बालकाण्ड

दोहा पाठ

बालचरित चहु बंधु के बनज बिपुल बहुरंग। नृप रानी परिजन सुकृत मधुकर बारि बिहंग॥ ४० ॥

अर्थ

चारों भाइयों के जो बालचरित हैं, वे ही इसमें खिले हुए रंग-बिरंगे बहुत-से कमल हैं। महाराज श्रीदशरथजी तथा उनकी रानियों और कुटुम्बियों के सत्कर्म (पुण्य) ही भ्रमर और जल-पक्षी हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ४० है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य