उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग
उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग
दोहा २५४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
उदित उदयगिरि मंच पर रघुबर बालपतंग। बिकसे संत सरोज सब हरषे लोचन भृंग॥ २५४ ॥
अर्थ
उदयगिरि रूपी मंच पर रघुवर रूपी बालसूर्य के उदित होते ही सब संतरूपी कमल खिल उठे और नेत्ररूपी भौरे हर्षित हो गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का दोहा २५४ है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।
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श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध