उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं

दोहा ४ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

उदासीन अरि मीत हित सुनत जरहिं खल रीति। जानि पानि जुग जोरि जन बिनती करइ सप्रीति॥ ४ ॥

अर्थ

दुष्टों की यह रीति है कि वे उदासीन, शत्रु अथवा मित्र, किसी का भी हित सुनकर जलते हैं। यह जानकर दोनों हाथ जोड़कर यह जन प्रेमपूर्वक उनसे विनय करता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “खल वन्दना” प्रकरण का दोहा ४ है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा खलों की वन्दना और उनके स्वभाव का परिचय का वर्णन है।

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खल वन्दना