बचन बज्र जेहि सदा पिआरा
बचन बज्र जेहि सदा पिआरा
चौपाई ६, दोहा ४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
बचन बज्र जेहि सदा पिआरा। सहस नयन पर दोष निहारा॥ ६ ॥
अर्थ
जिनको कठोर वचनरूपी वज्र सदा प्यारा लगता है और जो हजार आँखों से दूसरों के दोषों को देखते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “खल वन्दना” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा ४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा खलों की वन्दना और उनके स्वभाव का परिचय का वर्णन है।
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खल वन्दना