तुम्हरी कृपाँ सुलभ सोउ मोरे
तुम्हरी कृपाँ सुलभ सोउ मोरे
चौपाई ६, दोहा १४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तुम्हरी कृपाँ सुलभ सोउ मोरे। सिअनि सुहावनि टाट पटोरे॥ ६ ॥
अर्थ
परन्तु हे कवियो! आपकी कृपा से यह बात भी मेरे लिये सुलभ हो सकती है। रेशम की सिलाई टाट पर भी सुहावनी लगती है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “कवि वन्दना” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा पूर्ववर्ती महाकवियों की वंदना और विनम्र भाव से रघुपति-कथा रचने के संकल्प का वर्णन है।
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कवि वन्दना