सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं

दोहा १४ (क) · बालकाण्ड

दोहा पाठ

सरल कबित कीरति बिमल सोइ आदरहिं सुजान। सहज बयर बिसराइ रिपु जो सुनि करहिं बखान॥ १४ (क) ॥

अर्थ

चतुर पुरुष उसी कविता का आदर करते हैं, जो सरल हो और जिसमें निर्मल चरित्र का वर्णन हो तथा जिसे सुनकर शत्रु भी स्वाभाविक वैर को भूलकर सराहना करने लगें।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “कवि वन्दना” प्रकरण का दोहा १४ (क) है। इस प्रकरण में तुलसीदास द्वारा पूर्ववर्ती महाकवियों की वंदना और विनम्र भाव से रघुपति-कथा रचने के संकल्प का वर्णन है।

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कवि वन्दना