तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा
तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा
चौपाई १, दोहा २७५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा। बार बार मोहि लागि बोलावा॥ सुनत लखन के बचन कठोरा। परसु सुधारि धरेउ कर घोरा॥ १ ॥
अर्थ
आप तो मानो काल को हाँक लगाकर बार-बार उसे मेरे लिये बुलाते हैं। लक्ष्मणजी के कठोर वचन सुनते ही परशुरामजी ने अपने भयानक फरसे को सुधारकर हाथ में ले लिया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २७५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद