सूर समर करनी करहिं कहि न
सूर समर करनी करहिं कहि न
दोहा २७४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सूर समर करनी करहिं कहि न जनावहिं आपु। बिद्यमान रन पाइ रिपु कायर कथहिं प्रतापु॥ २७४ ॥
अर्थ
शूरवीर तो युद्ध में करनी (शूरवीरता का कार्य) करते हैं, कहकर अपने को नहीं जनाते। शत्रु को युद्ध में उपस्थित पाकर कायर ही अपने प्रताप की डींग मारते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद” प्रकरण का दोहा २७४ है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम के मध्य तीखा संवाद तथा परशुराम का शांत होना का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण और परशुराम संवाद