तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना

चौपाई ३, दोहा १११ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तुम्ह त्रिभुवन गुर बेद बखाना। आन जीव पाँवर का जाना॥ प्रस्न उमा कै सहज सुहाई। छल बिहीन सुनि सिव मन भाई॥ ३ ॥

अर्थ

वेदों ने आपको तीनों लोकों का गुरु कहा है। दूसरे पामर जीव इस रहस्य को क्या जानें! पार्वतीजी के सहज सुन्दर और छलरहित (सरल) प्रश्न सुनकर शिवजी के मन को बहुत अच्छे लगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।

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शिव-पार्वती संवाद