औरउ राम रहस्य अनेका
औरउ राम रहस्य अनेका
चौपाई २, दोहा १११ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
औरउ राम रहस्य अनेका। कहहु नाथ अति बिमल बिबेका॥ जो प्रभु मैं पूछा नहिं होई।सोउ दयाल राखहु जनि गोई॥ २ ॥
अर्थ
[इसके सिवा] श्रीरामचन्द्रजी के और भी जो अनेक रहस्य (छिपे हुए भाव अथवा चरित्र) हैं, उनको कहिये। हे नाथ! आपका विवेक अत्यन्त निर्मल है। हे प्रभो! जो बात मैंने न भी पूछी हो, हे दयालु! उसे भी आप छिपा न रखियेगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिव-पार्वती संवाद” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १११ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विवाह के बाद पार्वती द्वारा राम के स्वरूप और अवतार-रहस्य के विषय में शिवजी से प्रेमपूर्ण संवाद का वर्णन है।
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शिव-पार्वती संवाद