तिन्ह कें गृह अवतरिहउँ जाई

चौपाई ३, दोहा १८७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तिन्ह कें गृह अवतरिहउँ जाई। रघुकुल तिलक सो चारिउ भाई॥ नारद बचन सत्य सब करिहउँ। परम सक्ति समेत अवतरिहउँ॥ ३ ॥

अर्थ

उन्हीं के घर जाकर मैं रघुकुल में श्रेष्ठ चार भाईयों के रूप में अवतार लूँगा। नारद के सब वचन मैं सत्य करूँगा और अपनी परम शक्ति के सहित अवतरित होऊँगा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “भगवान का वरदान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भगवान द्वारा रघुकुल में अवतार लेने के वरदान और देवताओं को मिली शांति का वर्णन है।

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भगवान का वरदान