हरिहउँ सकल भूमि गरुआई

चौपाई ४, दोहा १८७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

हरिहउँ सकल भूमि गरुआई। निर्भय होहु देव समुदाई॥ गगन ब्रह्मबानी सुनि काना। तुरत फिरे सुर हृदय जुड़ाना॥ ४ ॥

अर्थ

मैं पृथ्वी का सब भार हर लूँगा। हे देवसमुदाय! तुम निर्भय हो जाओ। आकाश में ब्रह्मवाणी को कान से सुनकर देवता तुरंत लौट गये। उनका हृदय जुड़ गया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “भगवान का वरदान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भगवान द्वारा रघुकुल में अवतार लेने के वरदान और देवताओं को मिली शांति का वर्णन है।

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भगवान का वरदान