कस्यप अदिति महातप कीन्हा
कस्यप अदिति महातप कीन्हा
चौपाई २, दोहा १८७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कस्यप अदिति महातप कीन्हा। तिन्ह कहुँ मैं पूरब बर दीन्हा॥ ते दसरथ कौसल्या रूपा। कोसलपुरीं प्रगट नरभूपा॥ २ ॥
अर्थ
कश्यप और अदिति ने बड़ा भारी तप किया था। मैं पहले ही उनको वर दे चुका हूँ। वे ही दशरथ और कौसल्या के रूप में मनुष्यों के राजा होकर कोसलपुरी में प्रकट हुए हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “भगवान का वरदान” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में भगवान द्वारा रघुकुल में अवतार लेने के वरदान और देवताओं को मिली शांति का वर्णन है।
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भगवान का वरदान