थके नयन रघुपति छबि देखें
थके नयन रघुपति छबि देखें
चौपाई ३, दोहा २३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
थके नयन रघुपति छबि देखें। पलकन्हिहूँ परिहरीं निमेषें॥ अधिक सनेहँ देह भै भोरी। सरद ससिहि जनु चितव चकोरी॥ ३ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी की छबि देखकर नेत्र थकित (निश्चल) हो गये। पलकोंने भी गिरना छोड़ दिया। अधिक स्नेह के कारण शरीर विह्वल हो गया। मानो शरद् ऋतु के चन्द्रमा को चकोरी बेसुध हो कर देख रही हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन