लता ओट तब सखिन्ह लखाए

चौपाई २, दोहा २३२ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

लता ओट तब सखिन्ह लखाए। स्यामल गौर किसोर सुहाए॥ देखि रूप लोचन ललचाने। हरषे जनु निज निधि पहिचाने॥ २ ॥

अर्थ

तब सखियों ने लता की ओट में सुन्दर श्याम और गौर कुमारों को दिखलाया। उनके रूप को देखकर नेत्र ललचा उठे; वे ऐसे प्रसन्न हुए मानो उन्होंने अपना खजाना पहचान लिया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २३२ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।

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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन