तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते
तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते
चौपाई ३, दोहा २२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते। गुर पद कमल पलोटत प्रीते॥ बार बार मुनि अग्या दीन्ही। रघुबर जाइ सयन तब कीन्ही॥ ३ ॥
अर्थ
वे ही दोनों भाई मानो प्रेम से जीते हुए प्रेमपूर्वक गुरु के चरणकमलों को दबा रहे हैं। मुनि ने बार-बार आज्ञा दी, तब श्रीरघुनाथजी ने जाकर शयन किया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण