मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई
मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई
चौपाई २, दोहा २२६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
मुनिबर सयन कीन्हि तब जाई। लगे चरन चापन दोउ भाई॥ जिन्ह के चरन सरोरुह लागी। करत बिबिध जप जोग बिरागी॥ २ ॥
अर्थ
तब श्रेष्ठ मुनि जाकर शयन किए। दोनों भाई उनके चरण दबाने लगे जिनके चरणकमलों के [दर्शन एवं स्पर्श के] लिए वैराग्यवान् पुरुष भी भाँति-भाँति के जप और योग करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २२६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण द्वारा जनकपुर भ्रमण और नगरवासियों के मुग्ध होने का वर्णन है।
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श्रीराम-लक्ष्मण का जनकपुर निरीक्षण