तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी

चौपाई २, दोहा ८३ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी॥ जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी॥ २ ॥

अर्थ

उन्होंने शिवजी को पति बनाने के लिये तप किया है, इधर शिवजी सब छोड़-छाड़कर समाधि लगा बैठे हैं। यद्यपि यह बड़ी असमंजस की बात है; तथापि मेरी एक बात सुनो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ८३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।

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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती