तेहिं खल पाछिल बयरु सँभारा
तेहिं खल पाछिल बयरु सँभारा
चौपाई ४, दोहा १७० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तेहिं खल पाछिल बयरु सँभारा। तापस नृप मिलि मंत्र बिचारा॥ जेहिं रिपु छय सोइ रचेन्हि उपाऊ। भावी बस न जान कछु राऊ॥ ४ ॥
अर्थ
उस दुष्ट ने पिछला वैर याद करके तपस्वी राजा से मिलकर सलाह विचारी (षड्यन्त्र किया) और जिस प्रकार शत्रु का नाश हो, वही उपाय रचा। भावी वश राजा (प्रतापभानु) कुछ भी न समझ सका।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा