तेहि के सत सुत अरु दस

चौपाई ३, दोहा १७० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तेहि के सत सुत अरु दस भाई। खल अति अजय देव दुखदाई॥ प्रथमहिं भूप समर सब मारे। बिप्र संत सुर देखि दुखारे॥ ३ ॥

अर्थ

उसके सौ पुत्र और दस भाई थे, जो बड़े ही दुष्ट, किसी से न जीते जानेवाले और देवताओं को दुःख देनेवाले थे। ब्राह्मणों, संतों और देवताओं को दुखी देखकर राजा ने उन सबको पहले ही युद्ध में मार डाला था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा