तौ भगवानु सकल उर बासी

चौपाई ३, दोहा २५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तौ भगवानु सकल उर बासी। करिहि मोहि रघुबर कै दासी॥ जेहि कें जेहि पर सत्य सनेहू। सो तेहि मिलइ न कछु संदेहू॥ ३ ॥

अर्थ

तो सबके हृदय में निवास करनेवाले भगवान् मुझे रघुश्रेष्ठ श्रीरामचन्द्रजी की दासी अवश्य बनायेंगे। जिसका जिसपर सच्चा स्नेह होता है, वह उसे मिलता ही है, इसमें कुछ भी सन्देह नहीं है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध