प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना
प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना
चौपाई ४, दोहा २५९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
प्रभु तन चितइ प्रेम तन ठाना। कृपानिधान राम सबु जाना॥ सियहि बिलोकि तकेउ धनु कैसें। चितव गरुरु लघु ब्यालहि जैसें॥ ४ ॥
अर्थ
प्रभु की ओर देखकर सीताजी ने शरीर के द्वारा प्रेम ठान लिया (अर्थात् यह निश्चय कर लिया कि यह शरीर इन्हीं का होकर रहेगा या रहेगा ही नहीं)। कृपानिधान श्रीरामजी सब जान गये। उन्होंने सीताजी को देखकर धनुष की ओर कैसे ताका, जैसे गरुड़जी छोटे-से साँप की ओर देखते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २५९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में लक्ष्मणजी के धर्मयुक्त रोष और रघुवंश के पराक्रम के प्रकटीकरण का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीलक्ष्मणजी का क्रोध