तात सुनहु सादर मनु लाई

चौपाई ३, दोहा ४७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

तात सुनहु सादर मनु लाई। कहउँ राम कै कथा सुहाई॥ महामोहु महिषेसु बिसाला। रामकथा कालिका कराला॥ ३ ॥

अर्थ

हे तात! तुम आदरपूर्वक मन लगाकर सुनो; मैं श्रीरामजी की सुन्दर कथा कहता हूँ। बड़ा भारी अज्ञान विशाल महिषासुर है और श्रीरामजी की कथा [उसे नष्ट कर देनेवाली] भयंकर कालीजी हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।

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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य