रामभगत तुम्ह मन क्रम बानी
रामभगत तुम्ह मन क्रम बानी
चौपाई २, दोहा ४७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामभगत तुम्ह मन क्रम बानी। चतुराई तुम्हारि मैं जानी॥ चाहहु सुनै राम गुन गूढ़ा। कीन्हिहु प्रस्न मनहुँ अति मूढ़ा॥ २ ॥
अर्थ
तुम मन, कर्म और वाणी से श्रीरामजी के भक्त हो। तुम्हारी चतुराई को मैं जान गया। तुम श्रीरामजी के रहस्यमय गुणों को सुनना चाहते हो; इसी से तुमने ऐसा प्रश्न किया है मानो बड़े ही मूढ़ हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में प्रयाग में भरद्वाज और याज्ञवल्क्य के संवाद तथा रामकथा की भूमिका का वर्णन है।
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याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद, प्रयाग माहात्म्य