तरुन अरुन अंबुज सम चरना
तरुन अरुन अंबुज सम चरना
चौपाई ४, दोहा १०६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
तरुन अरुन अंबुज सम चरना। नख दुति भगत हृदय तम हरना॥ भुजग भूति भूषन त्रिपुरारी। आननु सरद चंद छबि हारी॥ ४ ॥
अर्थ
उनके चरण नये (पूर्णरूप से खिले हुए) लाल कमल के समान थे, नखों की ज्योति भक्तों के हृदय का अन्धकार हरनेवाली थी। साँप और भस्म ही उनके भूषण थे और उन त्रिपुरासुरके शत्रु शिवजी का मुख शरद् चन्द्रमा की शोभा को भी हरनेवाला (फीकी करनेवाला) था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह