जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन
जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन
दोहा १०६ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल। नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल॥ १०६ ॥
अर्थ
उनके सिर पर जटाओं का मुकुट और गंगा जी शोभायमान थीं। कमल के समान बड़े-बड़े नेत्र थे। उनका नीलकण्ठ था और वे सुन्दरता के भण्डार थे। उनके मस्तक पर द्वितीया का चन्द्रमा शोभित था।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का दोहा १०६ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह