तड़ित बिनिंदक पीत पट उदर रेख

दोहा १४७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

तड़ित बिनिंदक पीत पट उदर रेख बर तीनि। नाभि मनोहर लेति जनु जमुन भवँर छबि छीनि॥ १४७ ॥

अर्थ

बिजली को लजानेवाला पीत पट था। पेट पर सुन्दर तीन रेखाएँ (त्रिवली) थीं। नाभि ऐसी मनोहर थी, मानो यमुना के भँवरों की छबि को छीने लेती हो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का दोहा १४७ है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान